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मंत्र क्या है और इसका क्या प्रयोग है? हमारे जीवन में मंत्रो का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है और मंत्र के माध्यम से सबकुछ प्राप्त किया जा सकता है मगर ये उतना सरल भी नहीं है जितना लोग समझते है । आजकल इंटरनेट पर मंत्रो की बाढ़ सी आ गयी है जहा देखो हर प्रकार के मंत्र है मगर ध्यान देने योग्य बात ये है की उन मंत्रो के साथ उसके प्रयोग की पूरी जानकारी न्यास विनियोग नियम संयम और हवन विधि कुछ भी उपलब्ध नहीं है मगर युवा पीढ़ी इन बातो से अनजान है उसे ऐसा ही लगता है की इस मंत्र को करने से उसकी समस्या हल हो जाएगी और वो बेचारा दिन रत मेहनत करके मंत्र को जपता जाता है कुछ नहीं होता अंत में वो निराश होकर बैठ जाता है और फिर मंत्रो को कोसने लग जाता है की ये सब बेकार है ढोंग है कुछ नहीं होता है बकवास है जबकि अगर ऐसे लोगो से पूछा जाये तो उनका जवाब यही होता है की हमे क्या पता जैसा लिखा हुआ था वैसा ही तो क्या मगर कुछ हुआ नहीं अब यहाँ गलती मंत्र को प्रकाशित करने वाले की भी है और साथ में करने वाले की भी है । इसलिए आज आपको हम बतायेगे मंत्र आखिर है क्या और इनका क्या इस्तेमाल है हमारे जीवन में ।

विभिन्न प्रकार के मंत्र का अलग अलग काम होता है जैसे कुछ ऐसे मंत्र होते है जो धन आकर्षण करते है ऐसे मंत्रो के माध्यम से हम धन को आकर्षित कर लेते है ऐसा लेकिन होता कैसे है ये कैसे मुमकिन है की संस्कृत के कुछ सब्द हमने पढ़े और धन आकर्षित हो गया क्या ये इतना आसान है ? जवाब है नहीं ! मगर नामुमकिन भी नहीं है !

असल में मंत्र आपके द्वारा बोले गए कुछ ऐसे सब्द होते है जो हवा में कुछ ऐसे डायग्राम बनाते है जो दीखते तो नहीं आँखों से मगर ये डायग्राम आपके और उस दुनिया के बिच एक दरवाजे का निर्माण कर सकते है जिनसे आपका सन्देश उस दुनिया तक पहुंच सके और साथ ही ये डायग्राम उस दुनिया से उस ऊर्जा को खींचने का भी काम करते है जो आपके कार्य को पूरा कर सके । आपने जरूर पढ़ा होगा की श्री यन्त्र के जरिये धन आकर्षण किया जा सकता है और ये धन सुख समृद्धि देने में सक्छम है । लेकिन कैसे ? असल में श्री यन्त्र जो की मंत्रो से सिद्ध होता है उसके अंदर ऐसी ऊर्जा होती है की वो लगातार धन समृद्धि की ऊर्जा को आकर्षित करता रहता है जहा ये स्थापित किया जाता है और इसके माध्यम से आपके घर में धन आगमन और समृद्धि सुरु हो जाती है । ठीक इसी प्रकार से हर मंत्र किसी न किसी प्रकार की ऊर्जा को आकर्षित करता है और उसके माध्यम से आपके समस्या का निदान होता है । अगर आपके सीमैटिक्स के बारे में सुना और पढ़ा होगा तो जरूर जानते होंगे की हर प्रकार की आवाज और ध्वनि तरंगो के जरिये किसी न किसी प्रकार का डायग्राम बनता है और वेदो में भी लिखा है की किसी भी व्यक्ति को फालतू नहीं बोलना चाहिए और गलत सब्द कभी नहीं बोलना चाहिए इसका अर्थ भी यही है की अगर आप बोलेगे तो जितना बोलेगे उतने प्रकार के ऊर्जा का निर्माण होगा और उस ऊर्जा का असर आपके ऊपर भी होगा साथ ही आपके आस पास के लोगो पर भी होगा जो लोग उग्र मंत्र जाप करते है उनके हाव भाव भी अक्सर उग्र देखे जाते है क्युकी उनके मंत्र के माध्यम से ऊर्जा शक्ति ऊर्जा आकर्षित होती है जो सीधे सरीर और दिमाग को प्रभावित करती है ।

मंत्र का अर्थ सिर्फ यही है की जिस प्रकार का मंत्र आप पढ़ते है उस मंत्र से उत्पन्न होने वाले ध्वनि से एक ऊर्जा चक्र का निर्माण होता है और ये ऊर्जा चक्र विशाल और विशाल और शक्तिशाली होता जाता है जैसे जैसे आपके मंत्र बढ़ते जाते है और जैसे जैसे ये ऊर्जा चक्र विशाल और शक्तिशाली होता जाता है वैसे वैसे इसमें उस दुनिया से सम्बन्धित ऊर्जा को खींचने की शक्ति बढ़ती जाती है और एकदिन वो ऊर्जा आपको वो सबकुछ प्रदान कर देती है जिसकी कामना से आप रोज मंत्र का जप करते है इसलिए शास्त्रों में कहा गया है की किसी भी साधना को एक ही जगह स्थान पर बैठे के एक निश्चित समय पर रोज करना चाहिए । अगर आप जगह स्थान को बदलते रहेंगे तो जहा जहा साधना करेंगे वह वह छोटे छोटे ऊर्जा चक्र बनते जायेगे मगर उनमे इतनी शक्ति नहीं होती की वो किसी शक्ति को ाआकर्षीत कर सके मगर जब आप रोज एक जगह पर बैठ के एक समय पर एक ही मंत्र रोज करते है तो वह पहले से ही एक ऊर्जा चक्र होता है जो दिखाई नहीं देता मगर होता है और ये जैसे जैसे आप रोज प्रतिदिन मंत्र करते जाते है इसकी शक्ति बढ़ती जाती है और ये तेजी से कार्य करता है और आपके कार्य को पूरा करने के लिए उस शक्ति को उस दुनिया से खींचना सुरु कर देती है अगर आप इन चीजों को समझना चाहते है तो आपको किसी एक मंटा का रोज अभ्यास करना चाहिए सालो तक तो आप इस बात को वाकई में समझ पाएंगे की ऐसाहोता है क्युकी एक निश्चित संख्या में मंत्र जप के बाद साधक को दिव्या अनुभूति सुरु हो जाती है और उन चीजों को समझने लगता है और महसूस करने लगता है या देखने लग जाता है जिनके बारे में अभी आप सिर्फ यहाँ पढ़ रहे है ।

हर प्रकार की साधना में यन्त्र का बहुत महत्व होता है जैसे अगर आप प्रेत साधना कर रहे है तो आपको शमशान जाना होगा या पीपल के पेड़ के निचे भी साधना कर सकते है बबूल के पेड़ के निचे ही साधना की जा सकती है मगर क्यों? क्युकी ये वो जगह है जहा अक्सर किसी न किसी प्रेत का निवास जरूर होता है और ऐसे जगह पर साधना करने मंत्र जपने से सिद्धि जल्द होती है इसके ठीक विपरीत अगर आप प्रेत वशीकरण मंत्र का जप किसी मंदिर में बैठ में करेंगे तो फल नहीं होगा क्युकी प्रेत जैसे शक्तिया पवित्र स्थल में नहीं जा सकती और ऐसे में अगर आप कहे की हमने मंत्र जपा हमे सिद्धि नहीं मिली तो ये बेकार की बात होगी । घर में कभी भी प्रेत भूत साधना नहीं करते इसकेलिए हमेसा निर्जन वन, किसी भूतहा जगह, या पेड़ या शमशान जो की सबसे उत्तम है जाना होता है । जैसी साधना करेंगे वैसी ही जगह होनी चाहिए तभी आपको मंत्र का लाभ समझ आएगा

वशीकरण के लिए संध्या काल रात्रि काल उत्तम होता है और स्थान के लिए शिव मंदिर, देवालय, या घर अच्छा होता है
विद्वेषण जैसे कार्य के लिए काली मंदिर, सिद्ध पीठ, उजाड़ जगह और घर से बाहर उत्तम होता है
साधना काल में इष्ट के अनुसार दिशा काल और स्थान का चयन करे
उच्चाटन के लिए जंगल, कुआ, तालाब, शमशान, मिटटी वाली जगह पथरीली जगह उत्तम होती है

मंत्र के अनुरूप ये जानना भी आवश्यक होता है की मंत्र से सम्बंदित देवी या देवता कौन है सिर्फ मंत्र को पढ़ लेना ही सबकुछ नहीं होता अगर मंत्र का जप कर रहे है तो उसके देवी देवता का ज्ञान होना भी जरुरी है जैसे क्रीं मंत्र की देवी काली है तो इस मंत्र में काली के ध्यान मंत्र और काली के अनुसार काला आसन, काळा रुदाक्ष या काळा हकीक की माला, कला वस्त्र और सरसो के टेल का दीपक चलेगा और इसमें काली माता की पूजा होगी सर्वप्रथम उसके बाद ही मंत्र जप सुरु होगा इसी प्रकार हर मंत्र का कोई न कोई स्वामी होता है उस स्वामी की पूजा करे बिना अनुमति लिए बिना साधना करना या मंत्र जपना व्यर्थ होता है और फल नहीं होता । मंत्रो के माध्यम से यन्त्र भी सिद्ध किये जाते है जैसे की श्री यन्त्र जिसकी महिमा अनंत बताई जाती है उसको भी मंत्रो से सिद्ध किया जाता है और बिना सिद्ध किया हुआ श्री यन्त्र काम नहीं करता मगर श्री यन्त्र उत्कीलन करने में श्री विद्या का प्रयोग होता है और श्री विद्या प्रयोग सबके वश की बात नहीं होती इसकेलिए श्री विद्या सिद्धि होनी चाहिए आवश्यक होगी । इसी प्रकार नारायण यन्त्र, शिव यन्त्र, दुर्गा यन्त्र जैसे कई अलग अलग यन्त्र है जिनको सिद्ध मंत्रो से किया जाता है या करवाया जाता है उसके बाद यन्त्र को धारण करते है या फिर पूजन करते है तो उसका फल प्राप्त होने लगता है मगर असल में होता ये है की जब हम किसी यन्त्र को सिद्ध करते है तो असल में हम मंत्र द्वारा जिस ऊर्जा चक्र का निर्माण करते है जैसा की ऊपर बताया जा चूका है उस ऊर्जा चक्र को अंत में मंत्र जप के अंत में उस यन्त्र में समाहित कर दिया जाता है जिस से वो यन्त्र चेतना में आ जाता है और उसमे कार्य करने की शक्ति आ जाती है जैसे अगर आपने काली यन्त्र को सिद्ध किया हुआ है तो इसका अर्थ ये हुआ की अपने काली मंत्र से उत्पन्न ऊर्जा को एकाग्र करके उस यन्त्र में समाहित करदिया जिसके कारण यन्त्र चैतन्य हो गया और उसका फल होने लगा क्युकी असल में काली मंत्र में क्लीं या क्रीं मंत्र को अगर सीमैटिक्स में देखेंगे तो आपको काली यन्त्र जैसा ही नजर आएगा, असल में वो काली शक्ति का ऊर्जा चक्र होता है और उसी ऊर्जा चक्र पर आधारित काली यन्त्र है जिसकी आप पूजा करते है

आशा है आपको मंत्रो का रहस्य और इनकी उपयोगिता और इनका कार्य करने का तरीका समझ आया होगा अगर किसी प्रकार की सहायता चाहते हो या कोई सवाल हो तो हमसे संपर्क करे

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