दुर्भाग्य नाशक अचूक मंत्र टोटके उपाय

दुर्भाग्य नाशक अचूक मंत्र टोटके उपायदुर्भाग्य नाशक अचूक मंत्र टोटके उपाय के माध्यम से अपने जीवन से कलह दुर्भाग्य दुःख को दूर किया जा सकता है और दुर्भाग्य नाशक अचूक मंत्र टोटके उपाय बहुत ही सरल है कलयुग में तो आइये जाने इसके बारे में और कामना करे की ईश्वर हमारे दुखो का नाश करे | दुर्भाग्य नाशक अचूक मंत्र टोटके उपाय के लिए सबसे पहले जरुरी है की आप शुद्ध हो और ईश्वर पर विस्वास रखते हो और साथ ही भक्ति भावना से भरे हो और दुर्भाग्य नाशक अचूक मंत्र टोटके उपाय करते वक़्त आपको इसपर पूरा विस्वास भी होना चाहिए तभी कल्याण संभव है जब दुर्भाग्य नाशक अचूक मंत्र टोटके उपाय का इस्तेमाल कर रहे हो तो नियम संयम से रहे ।

१.श्री गणेश के प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति के आगे गणेश अर्थवशेष और संकटनाशक गणेश स्त्रोत्र का ११ -११ पाठ करिये और उसके बाद ७ मुंग १० ग्राम धनिया साबूत, एक सिद्ध पंचमुखी रुद्राक्ष, एक चंडी का सिक्का और २ सुपाड़ी, २ खड़ी हल्दी की गाठ गणेश जी के सामने रख दे और उसके बाद गणेश मंत्र का ११ माला जाप करे उसके बाद प्राथना करे की समस्त संकट और दुःख दरिद्र दूर हो और जीवन में सुख समृद्धि का आगमन हो उसके बाद सभी सामान हो नदी में विसर्जित करदे इस से जीवन के समस्त आपदा, विघ्न और संकट का नाश होता है और जीवन में सुख समरडीही का आगमन होने लगता है किसी कार्य विशेष के लिए ये अचूक उपाय है

२, बरगद की लकड़ी से हवन प्रज्ज्वलित करके बरगद की हरी डाल पर गौ घी से बानी हुई खीर रख कर १०८ बार हवन प्रतिदिन हवन करे और ऐसा ७ दिन तक लगातार करे हवन कुंड में सिर्फ बरगद की लकड़ी ही इस्तेमाल करे ऐसा करने से कैसा भी हो संकट दूर हो जाता है इतना ही नहीं अकाल मृत्यु भी अगर हो तो टल जाती है और जीवन सुखी होता है अगर अचूक प्रभाव चाहे तो हमेशा पूर्णिमा से लेकर ७ दिन तक हवन करे और एक साल में काम से काम ४ बार ऐसा करे तो जीवन में सुख समृद्धि और धन वैभव प्राप्त होता है सभी बाधा रोग आदि नष्ट हो जाते है

३. व्यापार बाधा या विवाह बाधा हो या किसी भी प्रकार के कार्य को बारबार करने पर भी असफलता मिल रही हो और निराशा प्राप्त होती हो तो ये अचूक टोटका इस्तेमाल करे मगर इसको पुरे तरह से गुप्त ही रखे शनिवार की रात ११ बजे से १२ बजे के बिच में सरसो के टेल से सिका हुआ गेहू और पुराने गुड़ से तैयार किया हुआ सात पूड़ी, ७ मदार की फूल ले और आटे से बना हुआ दिया ले और उसमे सरसो का तेल भरे और रुई की बत्ती लगाए ये सरे सामान लेकर किसी पत्तल पर रखे और चौराहे पर जाकर सारा सामान रख दे और आटे का दिया जला दे और पूड़ी पर सिन्दूर से तिलक करदे उसके बाद हाथ जोड़ कर कहे की हे मेरे दुर्भाग्य मई तुम्हे यहाँ छोड़ कर जा रहा हु मेरे साथ वापस न आना और मेरा पीछा मत करना ये सामग्री स्वीकार करो उसके बाद बिना पीछे मुड़कर देखे घर वापस आ जाये और ये ध्यान रहे की उस चौराहे पर कम से कम ६ महीने तक वापस न जाये ऐसा करने से निश्चय ही दुर्भाग्य पीछा छोड़ देता है और जीवन सुख समृद्धि से परिपूर्ण हो जाता है ये उपाय अगर अमावस जब शनिवार को पड़े तब करे तो कई गुना ज्यादा लाभ होता है |

4. किसी के प्रत्येक शुभ कार्य में बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार को भैरों जी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ा कर “बटुक भैरव स्तोत्र´´ का एक पाठ कर के गौ, कौओं और काले कुत्तों को उनकी रूचि का पदार्थ खिलाना चाहिए। ऐसा वर्ष में 4-5 बार करने से कार्य बाधाएं नष्ट हो जाएंगी।

5. रूके हुए कार्यों की सिद्धि के लिए यह प्रयोग बहुत ही लाभदायक है। गणेश चतुर्थी को गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दायीं ओर मुड़ी हुई हो। इसकी आराधना करें। इसके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें `जय गणेश काटो कलेश´।

6. सरकारी या निजी रोजगार क्षेत्र में परिश्रम के उपरांत भी सफलता नहीं मिल रही हो, तो नियमपूर्वक किये गये विष्णु यज्ञ की विभूति ले कर, अपने पितरों की `कुशा´ की मूर्ति बना कर, गंगाजल से स्नान करायें तथा यज्ञ विभूति लगा कर, कुछ भोग लगा दें और उनसे कार्य की सफलता हेतु कृपा करने की प्रार्थना करें। किसी धार्मिक ग्रंथ का एक अध्याय पढ़ कर, उस कुशा की मूर्ति को पवित्र नदी या सरोवर में प्रवाहित कर दें। सफलता अवश्य मिलेगी। सफलता के पश्चात् किसी शुभ कार्य में दानादि दें।

7. सिन्दूर लगे हनुमान जी की मूर्ति का सिन्दूर लेकर सीता जी के चरणों में लगाएँ। फिर माता सीता से एक श्वास में अपनी कामना निवेदित कर भक्ति पूर्वक प्रणाम कर वापस आ जाएँ। इस प्रकार कुछ दिन करने पर सभी प्रकार की बाधाओं का निवारण होता है।

8. किसी शनिवार को, यदि उस दिन `सर्वार्थ सिद्धि योग’ हो तो अति उत्तम सांयकाल अपनी लम्बाई के बराबर लाल रेशमी सूत नाप लें। फिर एक पत्ता बरगद का तोड़ें। उसे स्वच्छ जल से धोकर पोंछ लें। तब पत्ते पर अपनी कामना रुपी नापा हुआ लाल रेशमी सूत लपेट दें और पत्ते को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती हैं और कामनाओं की पूर्ति होती है।

9. रविवार पुष्य नक्षत्र में एक कौआ अथवा काला कुत्ता पकड़े। उसके दाएँ पैर का नाखून काटें। इस नाखून को ताबीज में भरकर, धूपदीपादि से पूजन कर धारण करें। इससे आर्थिक बाधा दूर होती है। कौए या काले कुत्ते दोनों में से किसी एक का नाखून लें। दोनों का एक साथ प्रयोग न करें।

10. प्रत्येक प्रकार के संकट निवारण के लिये भगवान गणेश की मूर्ति पर कम से कम 21 दिन तक थोड़ी-थोड़ी जावित्री चढ़ावे और रात को सोते समय थोड़ी जावित्री खाकर सोवे। यह प्रयोग 21, 42, 64 या 84 दिनों तक करें।

11. अक्सर सुनने में आता है कि घर में कमाई तो बहुत है, किन्तु पैसा नहीं टिकता, तो यह प्रयोग करें। जब आटा पिसवाने जाते हैं तो उससे पहले थोड़े से गेंहू में 11 पत्ते तुलसी तथा 2 दाने केसर के डाल कर मिला लें तथा अब इसको बाकी गेंहू में मिला कर पिसवा लें। यह क्रिया सोमवार और शनिवार को करें। फिर घर में धन की कमी नहीं रहेगी।

12. आटा पिसते समय उसमें 100 ग्राम काले चने भी पिसने के लियें डाल दिया करें तथा केवल शनिवार को ही आटा पिसवाने का नियम बना लें।

13॰ शनिवार को खाने में किसी भी रूप में काला चना अवश्य ले लिया करें।

14॰ अगर पर्याप्त धर्नाजन के पश्चात् भी धन संचय नहीं हो रहा हो, तो काले कुत्ते को प्रत्येक शनिवार को कड़वे तेल (सरसों के तेल) से चुपड़ी रोटी खिलाएँ।

15॰ संध्या समय सोना, पढ़ना और भोजन करना निषिद्ध है। सोने से पूर्व पैरों को ठंडे पानी से धोना चाहिए, किन्तु गीले पैर नहीं सोना चाहिए। इससे धन का क्षय होता है।

16॰ रात्रि में चावल, दही और सत्तू का सेवन करने से लक्ष्मी का निरादर होता है। अत: समृद्धि चाहने वालों को तथा जिन व्यक्तियों को आर्थिक कष्ट रहते हों, उन्हें इनका सेवन रात्रि भोज में नहीं करना चाहिये।

17. भोजन सदैव पूर्व या उत्तर की ओर मुख कर के करना चाहिए। संभव हो तो रसोईघर में ही बैठकर भोजन करें इससे राहु शांत होता है। जूते पहने हुए कभी भोजन नहीं करना चाहिए।

18॰ सुबह कुल्ला किए बिना पानी या चाय न पीएं। जूठे हाथों से या पैरों से कभी गौ, ब्राह्मण तथा अग्नि का स्पर्श न करें।

19॰ घर में देवी-देवताओं पर चढ़ाये गये फूल या हार के सूख जाने पर भी उन्हें घर में रखना अलाभकारी होता है।

20॰ अपने घर में पवित्र नदियों का जल संग्रह कर के रखना चाहिए। इसे घर के ईशान कोण में रखने से अधिक लाभ होता है।

21॰ रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र हो, तब गूलर के वृक्ष की जड़ प्राप्त कर के घर लाएं। इसे धूप, दीप करके धन स्थान पर रख दें। यदि इसे धारण करना चाहें तो स्वर्ण ताबीज में भर कर धारण कर लें। जब तक यह ताबीज आपके पास रहेगी, तब तक कोई कमी नहीं आयेगी। घर में संतान सुख उत्तम रहेगा। यश की प्राप्ति होती रहेगी। धन संपदा भरपूर होंगे। सुख शांति और संतुष्टि की प्राप्ति होगी।